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डॉक्टरों के संगठन ने चेतावनी दी
Maharashtra महाराष्ट्र: राज्य के स्वास्थ्य तंत्र पर बड़ा असर डालने वाली खबर सामने आई है। महाराष्ट्र के सरकारी डॉक्टरों ने 3 नवंबर से अनिश्चितकालीन राज्यव्यापी हड़ताल पर जाने का ऐलान किया है। डॉक्टरों के संगठन ने चेतावनी दी है कि अगर उनकी मांगें पूरी नहीं की गईं तो राज्यभर के सभी सरकारी अस्पतालों में आउट पेशेंट डिपार्टमेंट (OPD) सेवाएं पूरी तरह बंद रहेंगी। हड़ताल की घोषणा महाराष्ट्र एसोसिएशन ऑफ रेजिडेंट डॉक्टर्स (MARD) और स्टेट गवर्नमेंट डॉक्टर्स एसोसिएशन ने संयुक्त रूप से की है। डॉक्टरों का कहना है कि वे लंबे समय से अपनी सेवा शर्तों, सुरक्षा और भत्तों में सुधार की मांग कर रहे हैं, लेकिन सरकार की ओर से अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है।
मांगें पूरी न होने से नाराज डॉक्टर एसोसिएशन के प्रतिनिधियों ने बताया कि वे कई बार राज्य सरकार को ज्ञापन दे चुके हैं। डॉक्टरों की प्रमुख मांगों में शामिल हैं ड्यूटी के दौरान सुरक्षा के लिए ठोस कानून लागू किया जाए। रेजिडेंट डॉक्टरों के स्टाइपेंड और वेतन वृद्धि तुरंत की जाए। कार्य समय का पुनर्गठन किया जाए ताकि 36 घंटे तक की लगातार ड्यूटी खत्म हो। डॉक्टरों के लिए आवासीय सुविधा और बीमा कवरेज सुनिश्चित किया जाए। MARD के प्रवक्ता डॉ. संदीप पाटिल ने कहा, “हम मरीजों को परेशानी नहीं देना चाहते, लेकिन सरकार को हमारी बात सुननी होगी। लगातार काम के बोझ और सुरक्षा की कमी ने डॉक्टरों को मानसिक रूप से थका दिया है। अब हमारे पास हड़ताल के अलावा कोई विकल्प नहीं बचा है।
हालांकि एसोसिएशन ने स्पष्ट किया है कि हड़ताल के दौरान आपातकालीन सेवाएं (Emergency Services), ICU और वार्ड में भर्ती मरीजों की देखभाल जारी रहेगी ताकि गंभीर मरीजों को कोई नुकसान न हो। लेकिन OPD, नियमित सर्जरी और बाहरी परामर्श सेवाएं पूरी तरह बंद रहेंगी। इस हड़ताल से राज्यभर के सरकारी अस्पतालों — जैसे JJ Hospital (मुंबई), ससून हॉस्पिटल (पुणे), नागपुर मेडिकल कॉलेज हॉस्पिटल, और औरंगाबाद GMC — में मरीजों को भारी परेशानी होने की आशंका है। महाराष्ट्र के स्वास्थ्य मंत्री तानाजी सावंत ने डॉक्टरों से हड़ताल टालने की अपील की है। उन्होंने कहा, “सरकार डॉक्टरों की मांगों पर गंभीरता से विचार कर रही है। हमें उम्मीद है कि बातचीत के जरिए कोई समाधान निकलेगा।”
हालांकि डॉक्टरों ने साफ कर दिया है कि जब तक उनकी मांगों पर लिखित आदेश नहीं आता, वे अपना आंदोलन जारी रखेंगे। सरकारी अस्पतालों में इलाज कराने वाले गरीब और ग्रामीण मरीजों में चिंता बढ़ गई है। कई मरीजों ने पहले से ही अपॉइंटमेंट कैंसिल कर दिए हैं। निजी अस्पतालों में भी भीड़ बढ़ने की आशंका है। इस हड़ताल का असर सिर्फ मुंबई और पुणे तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि राज्य के सभी 36 जिलों में स्वास्थ्य सेवाओं पर व्यापक असर पड़ने की संभावना है।
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